24 घंटे में एफआईआर का नियम, लेकिन एक दिन बाद दर्ज हुआ मुकदमा! वायरल ऑडियो से घिरा बिजली विभाग, रिश्वत के आरोपों पर उठे बड़े सवाल
- Kumar Nandan Pathak
- 8 जुल॰
- 2 मिनट पठन
केपीपीएन संवाददाता।
अम्बेडकरनगर। बिजली विभाग इन दिनों गंभीर विवादों के केंद्र में है। एक ओर विभागीय कर्मचारियों पर 12 हजार रुपये की कथित रिश्वत मांगने के आरोप हैं, तो दूसरी ओर बिजली चोरी के मामले में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई है। इस बीच कथित अवैध वसूली से जुड़ी एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिससे पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। हालांकि, केपीपीएन न्यूज़ वायरल ऑडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता।
शिकायतकर्ता अनिल कुमार पाल का आरोप है कि 17 जून 2026 को शाम लगभग 4 बजे बिजली विभाग की टीम ने उनके परिसर की जांच की। जांच के बाद टीजी-2 अंकित सिंह तथा संविदा कर्मी विपुल वर्मा और विवेक वर्मा ने कथित रूप से एफआईआर दर्ज कराने का भय दिखाकर 12 हजार रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसे 18 जून को पावर हाउस बुलाकर रकम देने के लिए कहा गया था।
पीड़ित का दावा है कि वह रुपये की व्यवस्था नहीं कर सका। इसके बाद 19 जून को उसके खिलाफ बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज करा दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यदि उसने रकम दे दी होती तो शायद मुकदमा दर्ज ही नहीं होता।
यहीं से पूरे मामले पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। शिकायतकर्ता का कहना है कि बिजली चोरी के मामलों में विभागीय नियमों के अनुसार जांच के बाद 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए, लेकिन उसके मामले में ऐसा नहीं हुआ। यदि यह दावा सही है, तो विभागीय प्रक्रिया और कार्रवाई की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते हैं।
मामले को और अधिक चर्चा में लाने वाली बात यह है कि कथित अवैध वसूली से जुड़ी एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। ऑडियो में कथित तौर पर लेन-देन और कार्रवाई को लेकर बातचीत सुनाई देने का दावा किया जा रहा है। यही कारण है कि लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि ऑडियो फर्जी है तो उसकी फॉरेंसिक जांच क्यों नहीं कराई जा रही, और यदि उसमें दम है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने 24 जून 2026 को अधीक्षण अभियंता को लिखित शिकायत देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, वायरल ऑडियो की जांच और संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की थी। आरोप है कि 7 जुलाई 2026 तक भी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
अब यह मामला केवल एक बिजली चोरी की एफआईआर तक सीमित नहीं रह गया है। सवाल विभाग की पारदर्शिता, कथित अवैध वसूली, वायरल ऑडियो और शिकायतों के निस्तारण की गति पर भी उठ रहे हैं। लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि विभाग इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सच सामने लाता है या फिर मामला फाइलों में ही दबकर रह जाता है।
यदि विभाग या संबंधित कर्मचारियों का पक्ष उपलब्ध हो, तो उसे भी इसी खबर में शामिल करने से रिपोर्ट अधिक संतुलित और पत्रकारिता की दृष्टि से मजबूत होगी।


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