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“कुर्बानी के अवशेषों की आग में झुलसी हरियाली! समधंन में वन विभाग की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल”


“प्लास्टिक और कचरे में लगाई आग बनी पर्यावरण के लिए खतरा, हरे-भरे पेड़ धुएं और लपटों में घिरे”


कन्नौज। जनपद कन्नौज के समधंन क्षेत्र में वन विभाग की कथित लापरवाही का एक और गंभीर मामला सामने आया है, जहां कुर्बानी के अवशेष दफनाने के दौरान पन्नी, प्लास्टिक और अन्य कचरे में लगाई गई आग ने आसपास की हरियाली को अपनी चपेट में ले लिया। आग की तेज लपटों और जहरीले धुएं से कई हरे-भरे पेड़-पौधे झुलस गए। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला।


ग्रामीणों का आरोप है कि जिस स्थान पर कुर्बानी के अवशेषों को दफनाया जा रहा था, वहीं खुलेआम पन्नी और कचरे के ढेर में आग लगा दी गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप लेना शुरू कर दिया और पास खड़े पेड़-पौधों को अपनी चपेट में ले लिया। धुएं का गुबार इतना ज्यादा था कि आसपास रहने वाले लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो गया। लोगों का कहना है कि यदि हवा तेज होती तो आग पास के बड़े हिस्से में फैल सकती थी और बड़ा हादसा हो सकता था।


स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में वन विभाग पूरी तरह मूकदर्शक बना रहा। मौके पर न तो कोई वन कर्मी दिखाई दिया और न ही आग बुझाने की कोई तत्काल व्यवस्था की गई। लोगों का कहना है कि जब क्षेत्र में हरियाली बचाने और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तब खुलेआम पेड़ों को आग की भेंट चढ़ने देना बेहद शर्मनाक है।


ग्रामीणों का यह भी कहना है कि समधंन क्षेत्र में पहले भी कई बार पेड़ों की कटाई और हरियाली को नुकसान पहुंचाने के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग हर बार चुप्पी साध लेता है। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर पर्यावरण संरक्षण के बड़े-बड़े दावे करने वाले अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे? क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था?


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग से उठ रहे जहरीले धुएं ने आसपास के वातावरण को पूरी तरह प्रदूषित कर दिया। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लोगों का कहना है कि प्लास्टिक और पन्नी जलाने से निकलने वाला धुआं बेहद खतरनाक होता है, इसके बावजूद खुलेआम इस तरह आग लगाना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।


क्षेत्रीय लोगों ने प्रशासन और वन विभाग से मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर रोक नहीं लगाई गई तो समधंन क्षेत्र की बची हुई हरियाली भी धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी।


अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि “हरियाली बचाने” के नाम पर अभियान चलाने वाला सिस्टम आखिर समधंन में हो रहे इस कथित पर्यावरणीय नुकसान पर कब जागेगा? या फिर फाइलों में योजनाएं चलती रहेंगी और जमीन पर हरियाली यूं ही आग की लपटों में झुलसती रहेगी।

 
 
 

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