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लखनऊ स्कालरशिप घोटाला 2.0: जेल में बंद छात्र की छात्रवृत्ति निकासी मामले में जांच की मांग तेज

लखनऊ- एस.आर. ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस (बीकेटी, लखनऊ) पर लगे छात्रवृत्ति गबन के आरोप अब और गंभीर हो गए हैं। जिस छात्र की न्यायिक हिरासत के दौरान उपस्थिति दिखाकर 50 हजार रुपये की छात्रवृत्ति निकाले जाने का दावा किया गया है, उस मामले में अब हाईकोर्ट में रिट दाखिल करने और उच्चस्तरीय जांच की तैयारी शुरू हो गई है। पीड़ित छात्र शिवम मिश्रा का आरोप है कि जिस समय वह जेल में था, उसी अवधि में कॉलेज रिकॉर्ड में उसकी बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज दिखाई गई। इतना ही नहीं, उसके बैंक खाते से छात्रवृत्ति की राशि भी निकाल ली गई। छात्र का कहना है कि उसने इस संबंध में आरटीआई के जरिए दस्तावेज जुटाए हैं और बैंक लेनदेन का रिकॉर्ड भी उसके पास है। इस मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला सवाल यह कि जब छात्र जेल में था तो कॉलेज में उसकी उपस्थिति कैसे दर्ज हुई? दूसरा, बैंक खाते से निकासी किस आधार पर हुई? क्या खाताधारक स्वयं मौजूद था। या किसी और ने हस्ताक्षर किए? अगर छात्र की मौजूदगी नहीं थी तो बैंक ने भुगतान कैसे पास किया? गौरतलब है कि हाल ही में एस.एस. इंस्टीट्यूट के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने कार्रवाई की थी। अब आरोप लग रहे हैं कि उसी तरह की कार्यप्रणाली एस.आर. संस्थान में भी अपनाई गई। दोनों संस्थानों के एक ही परिवार से जुड़े होने के कारण मामला और संवेदनशील हो गया है। बैंक ऑफ बड़ौदा की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि निकासी छात्र की गैरमौजूदगी में हुई है तो यह बैंकिंग नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। बैंक अधिकारियों की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। समाज कल्याण विभाग की निगरानी प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। छात्रवृत्ति जारी होने से पहले ऑनलाइन सत्यापन और उपस्थिति की पुष्टि की प्रक्रिया होती है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि किस स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई। पीड़ित छात्र ने मुख्यमंत्री से मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही हाईकोर्ट में याचिका दायर कर स्वतंत्र जांच एजेंसी से पूरे प्रकरण की जांच कराने की तैयारी है। अब देखना यह है कि क्या इस मामले में भी एस.एस. प्रकरण की तरह कड़ी कार्रवाई होती है या जांच विभागीय स्तर तक सीमित रह जाती है। मामला केवल एक छात्र का नहीं, बल्कि पूरी छात्रवृत्ति व्यवस्था की विश्वसनीयता का है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह प्रदेश की शिक्षा और बैंकिंग प्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न होगा।

 
 
 

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